बलीन्द्रसंवादः — Kāla, Anityatā, and the Limits of Agency
Mahābhārata 12.217
विधिज्ञेभ्यो द्विजातिभ्यो ग्राह्ममन्नं विशिष्यते | आहारनियमेनास्य पाप्मा शाम्यति राजस:
वैदिक विधि को जानने और उसके अनुसार आचरण करने वाले द्विजों से ही अन्न ग्रहण करना श्रेष्ठ माना गया है। ऐसे अन्न को नियमपूर्वक खाने से रजोगुणजन्य पाप शान्त हो जाता है।
भीष्म उवाच