इन्द्र–बलि संवादः
The Dialogue of Indra and Bali on Fortune, Humility, and Restraint
व्यापकं सर्वभूतेषु वर्तते5प्रतिघं मन: । आत्मप्रभावात् तं विद्यात् सर्वा ह्यात्मनि देवता:
मन की सर्वत्र अबाध गति है। वह अपने अधिष्ठान-भूत आत्मा के ही प्रभाव से सम्पूर्ण भूतों में व्याप्त है; अतः आत्मा को अवश्य जानना चाहिये, क्योंकि सभी देवता आत्मा में ही स्थित हैं।
भीष्म उवाच