Prahlāda–Indra Saṃvāda: Kartṛtva (Agency) and Svabhāva (Nature) in the Causation of Karma
धृतिमानात्मवान् बुद्धि निगृह्लीयादसंशयम् । मनो बुद्धया निगृह्लीयाद् विषयान्मनसा55त्मन:
धैर्यवान् और आत्मसंयमी पुरुष को चाहिए कि वह निःसंदेह बुद्धि को अपने वश में करे; फिर बुद्धि के द्वारा मन को वश में करे, और मन के द्वारा अपनी इन्द्रियों को विषयों की ओर से रोककर अपने अधीन कर ले।
भीष्म उवाच