मनस्–बुद्धि–गुणविचारः (Manas–Buddhi–Guṇa Inquiry) — Meditation and Nirguṇa Realization
भीष्म उवाच धर्मस्यांशप्रसूतो $सि धर्मिष्ठोईसि स्वभावत: । धर्ममूलाश्रयं वाक््यं शृणुष्वावहितो5नघ
भीष्म ने कहा—अनघ! तुम धर्म के अंश से उत्पन्न हुए हो और स्वभाव से ही धर्मनिष्ठ हो; अतः सावधान होकर धर्ममूल पर आश्रित मेरी बात सुनो।
भीष्म उवाच