ध्यानयोगवर्णनम्
Description of the Path of Meditation
क्षेत्रज्ं तं विजानीहि नित्यं लोकहितात्मकम् । तमो रजश्न सत्त्वं च विद्धि जीवगुणानिमान्
उस क्षेत्रज्ञ आत्मा को सदा जानो—वह नित्य लोकहितस्वरूप है। तमोगुण, रजोगुण और सत्त्वगुण—इन तीनों को जीव के गुण समझो।
भरद्वाज उवाच