Adhyāya 177: Pañca-mahābhūta-vicāra and Vṛkṣa-jīva-lakṣaṇa
Five Elements Inquiry and the Status of Plant Life
श्रिया हुभीक्ष्णं संवासो मोहयत्यविचक्षणम् । सा तस्य चित्त हरति शारदा भ्रमिवानिल:
सदा धन-सम्पत्ति का सहवास मूर्ख मनुष्य के चित्त को लुभाकर उसे मोह में ही डाले रहता है। जैसे वायु शरद्-ऋतु के बादलों को उड़ा ले जाती है, उसी प्रकार वह सम्पत्ति मनुष्य के मन को हर लेती है।
भीष्म उवाच