प्रजाविसर्ग-तत्त्वनिर्णयः | Cosmogony of Elemental Emergence
Bharadvāja–Bhṛgu Dialogue
श्वः कार्यमद्य कुर्वीत पूर्वाह्ने चापराह्निकम् | न हि प्रतीक्षते मृत्यु: कृतमस्य न वा कृतम्
कल का काम आज ही कर लेना चाहिए; जो सायंकाल करना हो, उसे भी प्रातःकाल में ही कर लेना चाहिए। क्योंकि मृत्यु यह नहीं देखती कि काम हुआ या नहीं।
भीष्म उवाच