प्रजाविसर्ग-तत्त्वनिर्णयः | Cosmogony of Elemental Emergence
Bharadvāja–Bhṛgu Dialogue
शष्पाणीव विचिन्वन्तमन्यत्रगतमानसम् | वृकीवोरणमासाद्य मृत्युरादाय गच्छति
जैसे घास चुनते हुए और मन कहीं और लगाए हुए भेड़ के पास अचानक भेड़िया आ पहुँचता है और उसे दबोचकर ले जाता है, वैसे ही मनुष्य का मन जब दूसरी ओर लगा होता है, उसी समय सहसा मृत्यु आकर उसे उठा ले जाती है।
भीष्म उवाच