Śānti-parva 168: Śoka-nivṛtti-buddhi (The Cognition that Reduces Grief) and Piṅgalā’s Nairāśya
नास्ति नासीन्नाभविष्यद् भूतं कामात्मकात् परम् | एतत् सारं महाराज धर्मार्थावत्र संस्थितौ
सब प्राणी कामना रखते हैं। कामना-रहित प्राणी उससे भिन्न न कहीं है, न कभी था, न भविष्य में होगा; इसलिए काम ही त्रिवर्ग का सार है। महाराज! धर्म और अर्थ भी इसी में स्थित हैं।
भीमयेन उवाच