अज्ञान–लोभयोः परस्परहेतुत्वम्
Mutual Causality of Ignorance and Greed
संवत्सरमुपास्याग्निमभिशस्त: प्रमुच्यते । त्रीणि वर्षाण्युपास्याग्निं भ्रूणहा विप्रमुच्यते
लगातार एक वर्ष तक अग्नि की उपासना करने से कलंकित पुरुष अपने कलंक से छूट जाता है। और तीन वर्ष तक अग्नि की उपासना करने से भ्रूणहत्यारा भी पाप से मुक्त हो जाता है।
शौनक उवाच