अज्ञान–लोभयोः परस्परहेतुत्वम्
Mutual Causality of Ignorance and Greed
ब्राह्मणानां सुखार्थ हि त्वं पाहि वसुधां नूप । यथैवैतान् पुरा$&क्षैप्सीस्तथैवैतान् प्रसादय
नरेश्वर! तुम ब्राह्मणों के सुख के लिए ही इस समस्त पृथ्वी का पालन करो। जैसे पहले तुमने इन ब्राह्मणों पर आक्षेप किया था, वैसे ही अब अपने प्रसाद और सद्व्यवहार से इन सबको प्रसन्न करो।
शौनक उवाच