Daṇḍa as the Foundation of Social Order (दण्डप्रतिष्ठा)
राजदण्डभयादेके पापा: पापं न कुर्वते । यमदण्डभयादेके परलोकभयादपि
rājadaṇḍabhayād eke pāpāḥ pāpaṃ na kurvate | yamadaṇḍabhayād eke paralokabhayād api |
अर्जुन बोले—कितने ही पापी राजदण्ड के भय से पाप नहीं करते; कुछ यमदण्ड के भय से, और कुछ परलोक के भय से भी। जगत की यही स्वाभाविक स्थिति है; इसलिए सब कुछ दण्ड पर ही प्रतिष्ठित है।
अजुन उवाच