Daṇḍa as the Foundation of Social Order (दण्डप्रतिष्ठा)
उदके बहव: प्राणा: पृथिव्यां च फलेषु च । नच वक्षिन्न तान हन्ति किमन्यत् प्राणयापनात्
जल में बहुत-से जीव हैं; पृथ्वी पर और वृक्षों के फलों में भी अनेक कीड़े हैं। ऐसा कोई मनुष्य नहीं जो इनमें से किसी को कभी न मारता हो। यह जीवन-निर्वाह के सिवा और क्या है?॥
अजुन उवाच