लुब्धक-कपोत-कपोती-आख्यानम्
The Hunter and the Pigeon Couple: Expiation and Refuge-Ethics
यदि सा रुक्तनेत्रान्ता चित्राड़ी मधुरस्वरा । अद्य नायाति मे कानन््ता न कार्य जीवितेन मे
जिसकी आँखों के कोने कुछ-कुछ लाल हैं, जिसके अंग चित्र-विचित्र शोभा से युक्त हैं और जिसकी वाणी मधुर है—वह मेरी प्राणवल्लभा यदि आज नहीं आती, तो मुझे इस जीवन से क्या प्रयोजन?
भीष्म उवाच