कपोत-लुब्धकसंवादः — Hunter’s Remorse and Renunciatory Resolve
परिमुष्णन्ति शास्त्राणि धर्मस्य परिपन्थिन: । वैषम्यमर्थविद्यानां निरर्था: ख्यापयन्ति ते
धर्म के विरोधी लोग शास्त्रों की प्रामाणिकता पर डाका डालते हैं और उन्हें अग्राह्य-अमान्य ठहराते हैं। अर्थ-ज्ञान से शून्य वे लोग अर्थशास्त्र की ‘विषमता’ का मिथ्या प्रचार करते फिरते हैं।
भीष्म उवाच