Dasyu-maryādā and Buddhi-guided Rāja-nīti (दस्युमर्यादा तथा बुद्धिप्रधान-राजनीति)
ये वैरिण: श्रद्दधते सत्ये सत्येतरेडपि वा । वध्यन्ते श्रद्धधानास्तु मधु शुष्कतृणैर्यथा
जो लोग वैरी की बात—चाहे वह सत्य हो या असत्य—उस पर विश्वास कर लेते हैं, वे विश्वास करनेवाले वैसे ही मारे जाते हैं, जैसे सूखे तिनकों से ढके गड्ढे पर रखे मधु को लेने जानेवाले।
ब्रह्मदत्त उवाच