Dasyu-maryādā and Buddhi-guided Rāja-nīti (दस्युमर्यादा तथा बुद्धिप्रधान-राजनीति)
पिता हि राजा राष्ट्रस्य प्रजानां यो5नुकम्पन: । तस्मिन् मिथ्याविनीतो हि तिर्यग् गच्छति मानव:
जो राजा प्रजाओं पर सदा अनुकम्पा रखता है, वह अपने राष्ट्र के लिए पिता के समान है। उसके प्रति जो मिथ्या भाव से विनीत बनता है, वह मनुष्य परजन्म में तिर्यक्—पशु-पक्षी की योनि—को प्राप्त होता है।
ब्रह्मदत्त उवाच