आपद्धर्मनिर्णयः — विश्वामित्र-श्वपचसंवादः
Apaddharma Determination: Dialogue of Viśvāmitra and the Śvapaca
वेदितव्यानि मित्राणि विज्ञेयाश्वापि शत्रव: | एतत् सुसूक्ष्मं लोके5स्मिन् दृश्यते प्राज्ञ सम्मतम्
मित्रों को पहचानना चाहिए और शत्रुओं को भी भली-भाँति समझ लेना चाहिए। इस लोक में मित्र-शत्रु की यह पहचान अत्यन्त सूक्ष्म है और बुद्धिमानों को मान्य है।
भीष्म उवाच