आपद्धर्मनिर्णयः — विश्वामित्र-श्वपचसंवादः
Apaddharma Determination: Dialogue of Viśvāmitra and the Śvapaca
श्रुतं मे तव मार्जार स्वमर्थ परिगृह्नत: । ममापि त्वं विजानासि स्वमर्थ परिगृह्नत:
हे बिलाव! अपने स्वार्थ की सिद्धि को सामने रखकर तुमने जो कुछ कहा, वह सब मैंने सुन लिया; और अपने प्रयोजन को ध्यान में रखकर मैंने जो कहा है, उसे भी तुम भली-भाँति समझते हो।
भीष्म उवाच