आपद्धर्मे राज्ञः नीतिः — Bharadvāja’s Counsel on Crisis-Statecraft (Śānti Parva 138)
इयमापत् समुत्पन्ना सर्वेषां सलिलौकसाम् । शीघ्रमन्यत्र गच्छाम: पन्था यावन्न दुष्यति
“बंधुओ! प्रतीत होता है कि इस जलाशय में रहने वाले समस्त जलचरों पर संकट आ पड़ा है। इसलिए, जब तक हमारे निकलने का मार्ग दूषित न हो जाए, तब तक शीघ्र ही हमें यहाँ से अन्यत्र चले जाना चाहिए।”
भीष्म उवाच