आपद्धर्मे राज्ञः नीतिः — Bharadvāja’s Counsel on Crisis-Statecraft (Śānti Parva 138)
काष्ठा: कला मुहूर्ताश्न दिवा रात्रिस्तथा लवा: । मासा: पक्षा: षड़ ऋतव: कल्प: संवत्सरास्तथा
kāṣṭhāḥ kalā muhūrtāś ca divā rātris tathā lavāḥ | māsāḥ pakṣāḥ ṣaḍ ṛtavaḥ kalpaḥ saṃvatsarās tathā ||
भीष्म ने कहा—काष्ठा, कला, मुहूर्त, दिन-रात और लव; मास, पक्ष, छः ऋतु, संवत्सर तथा कल्प—इन सबको ‘काल’ कहते हैं और पृथ्वी को ‘देश’ कहा जाता है। देश तो प्रत्यक्ष दिखता है, पर काल दिखाई नहीं देता। इसलिए अभीष्ट उद्देश्य की सिद्धि के लिए जिस देश और काल को उपयोगी समझकर विचार किया जाए, उसे ठीक-ठीक पहचानकर ग्रहण करना चाहिए।
भीष्म उवाच