Kośa, Bala, and Maryādā: Treasury, Capacity, and Enforceable Limits (कोश-बल-मर्यादा)
अन्यत्र राजन् हिंसाया वृत्तिर्नेहास्ति कस्यचित् । अप्यरण्यसमुत्थस्य एकस्य चरतो मुने:
राजन्! इस संसार में किसी की भी ऐसी वृत्ति नहीं है जो हिंसा से सर्वथा शून्य हो; औरों की तो बात ही क्या, वन में रहकर एकाकी विचरने वाले मुनि की वृत्ति भी पूर्णतः अहिंसामय नहीं होती।
भीष्म उवाच