Āśā-prabhava (आशाप्रभव) — On the Rise and Power of Hope/Expectation
Sumitra Itihāsa Begins
निश्चक्राम ततस्तस्मात् पृष्टश्चाह महाबल: । वृत्तं प्रह्द मां विद्धि यतः सत्यं ततो हाहम्
तब वहाँ से एक महाबली प्रकट हुआ। पूछे जाने पर उसने कहा—“प्रह्लाद! मुझे सदाचार (वृत्त) समझो। जहाँ सत्य है, वहीं मैं भी हूँ।”
ब्राह्मण उवाच