त्रिवर्गमूलनिश्चयः — Determining the Roots of Dharma, Artha, and Kāma
Mahābhārata, Śānti-parva 123
तं ददौ सूर्यपुत्रस्तु मनुर्वे रक्षणार्थकम् । आनुपूर्व्याच्च दण्डो<यं प्रजा जागर्ति पालयन्
सूर्यपुत्र मनु ने प्रजा की रक्षा के लिए ही यह दण्ड अपने पुत्रों के हाथों में सौंपा था। वही दण्ड क्रमशः आगे-आगे अधिकारियों के हाथों में आता हुआ, प्रजा का पालन करता हुआ सदा जाग्रत रहता है।
वसुहरोम उवाच