Vyāghra–Gomāyu Saṃvāda (व्याघ्रगोमायु संवाद) — Testing Character Beneath Appearances
किं तु स्वेनास्मि संतुष्टो दुःखवृत्तिरनुछ्िता । सेवायां चापि नाभिज्ञ: स्वच्छन्देन वनेचर:
किन्तु मैं अपने आप में ही संतुष्ट हूँ। मैंने ऐसी जीविका अपनायी है जो अत्यन्त दुःखमयी है। मैं राजसेवा के कार्य से अनभिज्ञ हूँ और वन में स्वच्छन्दतापूर्वक विचरता हूँ।
शार्टूल उवाच