Ānṛśaṃsya, Amātya-Guṇa, and Reconciliatory Counsel (आनृशंस्य–अमात्यगुण–संधि-उपदेशः)
यस्त्वं प्रच्यावितो राज्याद् व्यसन चोत्तमं गत: । आनुृशंस्येन वृत्तेन क्षत्रियेच्छसि जीवितुम्
राजकुमार! तुम्हें राज्य से भ्रष्ट कर दिया गया है। तुम बड़ी भारी विपत्ति में पड़ गये हो, तथापि तुमने क्रूरता को नहीं अपनाया; तुम दयायुक्त बर्ताव से ही जीवन बिताना चाहते हो।
भीष्म उवाच