Duryodhana’s Post-Duel Lament and Instructions (भग्नसक्थस्य विलापः)
“अच्युत! दुर्योधनके मारे जानेपर वे सारे आघात सफल हो गये। श्रीकृष्ण! अब ऐसा कीजिये, जिससे वह सारा किया-कराया कार्य फिर नष्ट न हो जाय ।। संदेहदोलां प्राप्तं नश्लेत: कृष्ण जये सति । गान्धार्या हि महाबाहो क्रोधं बुद्धयसझ्व माधव,श्रीकृष्ण! आज विजय हो जानेपर भी हमारा मन संदेहके झूलापर झूल रहा है। महाबाहु माधव! आप गान्धारी देवीके क्रोधपर तो ध्यान दीजिये
vaiśampāyana uvāca |
acyuta! duryodhanake māre jāne para ve sāre āghāta saphala ho gaye | śrīkṛṣṇa! aba aisā kījiye, jisase vaha sārā kiyā-karāyā kārya phira naṣṭa na ho jāya ||
saṃdeha-dolāṃ prāptaṃ naśyeta kṛṣṇa jaye sati |
gāndhāryā hi mahābāho krodhaṃ buddhyasva mādhava ||
वैशम्पायन बोले— अच्युत! दुर्योधन के मारे जाने पर वे सब आघात और प्रयत्न सफल हो गये। श्रीकृष्ण! अब ऐसा कीजिये कि यह सारा किया-कराया काम फिर नष्ट न हो। विजय होने पर भी हमारा मन संदेह के झूले पर झूल रहा है। महाबाहु माधव! आप गान्धारी के क्रोध पर ध्यान दीजिये।
वैशम्पायन उवाच