Gadā-yuddhe Bhīma–Duryodhanayoḥ Tumulaḥ Saṃprahāraḥ
Mace-duel’s intense exchange
अभ्यतिष्ठत युद्धाय शक्रो वृत्रमिवाह्ययन् । नृपश्रेष्ठी ऐसा कहकर पराक्रमी भीमसेन हाथमें गदा ले युद्धके लिये खड़े हो गये और जैसे इन्द्रने वृत्रासुरको ललकारा था, उसी प्रकार वे दुर्योधनका आह्वान करने लगे ।। २७६ || तमुद्यतगद दृष्टवा कैलासमिव शुद्धिणम्
sañjaya uvāca | abhyatiṣṭhata yuddhāya śakro vṛtram ivāhvayan | tam udyatagadaṃ dṛṣṭvā kailāsam iva śuddhiṇam ||
तब पराक्रमी भीमसेन युद्ध के लिए खड़े हो गए और जैसे इन्द्र ने वृत्रासुर को ललकारा था, वैसे ही दुर्योधन को आह्वान करने लगे। उन्हें उठी हुई गदा सहित देखकर—कैलास पर्वत के समान उज्ज्वल और भयानक—शत्रु ने प्रहार को तत्पर योद्धा को देखा।
संजय उवाच