बदरपाचन-तीर्थमाहात्म्यम् | Badarapācana Tīrtha Māhātmya
Indratīrtha and the Austerities of Srucāvatī & Arundhatī
तत्राप्लुत्य बलो राजन् दत्त्वा दायांश्व पुष्कलान् | जगाम त्वरितो रामस्तीर्थ श्वेतानुलेपन:,राजन! उस तीर्थमें स्नान और प्रचुर दान करके श्वेत चन्दनधारी बलरामजी शीघ्रतापूर्वक बदरपाचन नामक शुभ तीर्थमें गये, जो सब प्रकारके जीव-जन्तुओंसे सेवित, नाना ऋतुओंकी शोभासे सम्पन्न वनस्थलियोंसे युक्त तथा निरन्तर फूलों और फलोंसे भरा रहनेवाला था
tatrāplutya balo rājan dattvā dāyāṁś ca puṣkalān | jagāma tvarito rāmas tīrthaśvetānulepanaḥ ||
वैशम्पायन बोले—राजन्! वहाँ स्नान करके और प्रचुर दान देकर, श्वेत चन्दन से लिप्त शरीर वाले बलराम जी शीघ्र ही अगले तीर्थ की ओर चल पड़े।
वैशम्पायन उवाच