बदरपाचन-तीर्थमाहात्म्यम् | Badarapācana Tīrtha Māhātmya
Indratīrtha and the Austerities of Srucāvatī & Arundhatī
यत्र लेभे महाबाहो धनाधिपतिरञ्जसा । महाबाहो! धनपति कुबेरने वहाँ अमिततेजस्वी रुद्रके साथ मित्रता, धनका स्वामित्व, देवत्व, लोकपालत्व और नलकूबर नामक पुत्र अनायास ही प्राप्त कर लिये ।। अभिकषिक्तश्च तत्रेव समागम्य मरुद्गणै:,वहीं आकर देवताओंने उनका अभिषेक किया तथा उनके लिये हंसोंसे जुता हुआ और मनके समान वेगशाली वाहन दिव्य पुष्पक विमान दिया। साथ ही उन्हें यक्षोंका राजा बना दिया
yatra lebhe mahābāho dhanādhipatir añjasā | mahābāho! dhanapatiḥ kubero neha amitatajasvī rudrakeṇa sārdhaṁ maitrīṁ, dhanasvāmitvaṁ, devatvaṁ, lokapālatvaṁ ca nalakūbara-nāmānaṁ putraṁ cānāyāsena prāpa || abhikṣiktaś ca tatraiva samāgamya marudgaṇaiḥ, haṁsaiḥ yuktam manaḥ-sama-vegaṁ divyaṁ puṣpaka-vimānaṁ tasmai dadur; yakṣāṇāṁ ca rājānaṁ cakruḥ ||
वैशम्पायन बोले—हे महाबाहो! उसी स्थान पर धनपति कुबेर ने अनायास ही अमिततेजस्वी रुद्र के साथ मित्रता, धन का स्वामित्व, देवत्व, लोकपालत्व और नलकूबर नामक पुत्र प्राप्त किया। फिर देवता मरुद्गणों सहित वहाँ एकत्र होकर उनका अभिषेक कर बैठे और उन्हें हंसों से जुता, मन के समान वेगशाली दिव्य पुष्पक विमान प्रदान किया; तथा उन्हें यक्षों का राजा नियुक्त किया।
वैशम्पायन उवाच