Sauptika Parva, Adhyaya 8 — Dhṛṣṭadyumna-vadha and the Camp’s Nocturnal Rout
एवंविधा हि सा रात्रि: सोमकानां जनक्षये । प्रसुप्तानां प्रमत्तानामासीत् सुभूशदारुणा
सोमकों के जन-क्षय के लिए वैसी ही वह रात थी—जो सोए हुए और असावधान लोगों के लिए अत्यन्त भयंकर बन गई।
संजय उवाच