Book 10, Adhyāya 12: Aśvatthāmā’s Request for the Cakra and the Brahmaśiras Context
एष पाण्डव ते भ्राता पुत्रशोकपरायण: । जिघांसुद्रौणिमाक्रन्दे एक एवाभिधावति,'पाण्डुनन्दन! ये आपके भाई भीमसेन पुत्रशोकमें मग्न होकर युद्धमें द्रोणकुमारके वधकी इच्छासे अकेले ही उसपर धावा कर रहे हैं
eṣa pāṇḍava te bhrātā putraśokaparāyaṇaḥ | jighāṃsu drauṇim ākrande eka evābhidhāvati ||
पाण्डुनन्दन! यह आपका भाई भीमसेन पुत्र-शोक में डूबा हुआ, द्रोणपुत्र अश्वत्थामा को मारने की इच्छा से, आर्तनाद करता हुआ अकेला ही उस पर धावा कर रहा है।
वैशम्पायन उवाच