अपि शेषं भवेदद्य पुत्राणां मम॒ संजय । भरतानां स्त्रिय: सर्वा गान्धार्या सह संगता:,संजय! उसके अभिशापसे मेरे सभी पुत्रोंका आज ही संहार हो जाता, परंतु उसने सब कुछ चुपचाप सह लिया। जिस समय रूप और यौवनसे सुशोभित होनेवाली पाण्डवोंकी धर्मपरायणा धर्मपत्नी कृष्णा सभामें लायी गयी, उस समय वहाँ उसे देखकर भरतवंशकी सभी स्त्रियाँ गान्धारीके साथ मिलकर बड़े भयानक स्वरसे विलाप एवं चीत्कार करने लगीं
api śeṣaṁ bhaved adya putrāṇāṁ mama sañjaya | bharatānāṁ striyaḥ sarvā gāndhāryā saha saṅgatāḥ ||
धृतराष्ट्र ने कहा—संजय! क्या आज मेरे पुत्रों में से कोई शेष भी रह पाता? भरतवंश की सभी स्त्रियाँ गान्धारी के साथ एकत्र होकर भयानक स्वर में विलाप करने लगीं।
धृतराष्ट उवाच