नरकं पातिता: पार्था दीर्घकालमनन्तकम् | सुखाच्च हीना राज्याच्च विनष्टा: शाश्वती: समा:,“कुन्तीके पुत्र दीर्घकालतकके लिये अनन्त दुःखरूप नरकमें गिरा दिये गये। ये सदाके लिये सुखसे वंचित तथा राज्यसे हीन हो गये हैं। जो लोग पहले अपने धनसे उन्मत्त हो धृतराष्ट्रपुत्रोंकी हँसी उड़ाया करते थे, वे ही पाण्डव आज पराजित हो अपने धन-वैभवसे हाथ धोकर वनमें जा रहे हैं
narakaṁ pātitāḥ pārthā dīrghakālam anantakam | sukhāc ca hīnā rājyaāc ca vinaṣṭāḥ śāśvatīḥ samāḥ ||
वैशम्पायन बोले—“पार्थों को दीर्घकाल के लिए अनन्त दुःखरूप नरक में गिरा दिया गया है। वे सुख से वंचित और राज्य से वियुक्त होकर असंख्य वर्षों तक नष्टप्राय हो गए हैं।”
वैशम्पायन उवाच