पाण्डवानां वनप्रस्थानवर्णनम् / The Pāṇḍavas’ Departure for the Forest
Vidura’s Report and Portents
तं वै शब्दं विदुरस्तत्त्ववेदी शुश्राव घोरं सुबलात्मजा च | भीष्मो द्रोणो गौतमश्नापि विद्वान् स्वस्ति स्वस्तीत्यपि चैवाहुरुच्चै:,तत्त्वज्ञानी विदुर तथा सुबलपुत्री गान्धारीने भी उस भयानक शब्दको सुना। भीष्म, द्रोण और गौतमवंशीय विद्वान् कृपाचार्यके कानोंमें भी वह अमंगलकारी शब्द सुन पड़ा। फिर तो वे सभी लोग उच्च स्वरसे “स्वस्ति', 'स्वस्ति” ऐसा कहने लगे
taṃ vai śabdaṃ viduras tattvavedī śuśrāva ghoraṃ subalātmajā ca | bhīṣmo droṇo gautamaś cāpi vidvān svasti svastīty api caivāhuruccaiḥ ||
वैशम्पायन बोले—तत्त्वज्ञानी विदुर ने वह घोर शब्द सुना और सुबल की पुत्री गान्धारी ने भी। भीष्म, द्रोण तथा गौतमवंशी विद्वान कृपाचार्य ने भी उस अमंगलकारी ध्वनि को सुना। तब वे सब ऊँचे स्वर से “स्वस्ति, स्वस्ति” कहकर कल्याण का आह्वान करने लगे।
वैशम्पायन उवाच