वसुदेव–अर्जुन संवादः
Vasudeva–Arjuna Dialogue in the Aftermath of Dvārakā
वीरहीनं वृद्धबालं पौरजानपदास्तथा । ययुस्ते परिवार्याथ कलत्नत्रं पार्थशासनात्,अर्जुनकी आज्ञासे अन्धकों और वृष्णियोंके नौकर, घुड़सवार, रथी तथा नगर और प्रान्तके लोग बूढ़े और बालकोंसे युक्त विधवा स्त्रियोंको चारों ओरसे घेरकर चलने लगे
vīrahīnaṃ vṛddhabālaṃ paurajānāpadās tathā | yayus te parivāryātha kalatrāṇi pārthaśāsanāt ||
वीरहीन होकर, बूढ़ों और बालकों सहित, नगर और जनपद के लोग पार्थ (अर्जुन) की आज्ञा से स्त्रियों को चारों ओर से घेरकर आगे बढ़े।
वैशम्पायन उवाच