उत्पातदर्शनम् — Portents and Kāla among the Vṛṣṇis
तच्छुत्वा केशवस्याड्कमगमद् रुदती तदा । सत्यभामा प्रकुपिता कोपयन्ती जनार्दनम्,यह सुनकर सत्यभामाके क्रोधकी सीमा न रही। वह श्रीकृष्णका क्रोध बढ़ाती और रोती हुई उनके अड्कमें चली गयी
tac chrutvā keśavasyāṅkam agamad rudatī tadā | satyabhāmā prakupitā kopayantī janārdanam ||
यह सुनकर सत्यभामा रोती हुई तत्काल केशव की गोद में जा बैठी। उसका क्रोध सीमा से परे था; वह शोक से व्याकुल होकर जनार्दन के क्रोध को भी भड़काने लगी।
वैशम्पायन उवाच