मौसलोत्पत्तिः — The Birth of the Musala and the Sages’ Pronouncement
उसे देखनेपर बड़े-बड़े धनुर्धर वीर उसके ऊपर लाखों बाणोंका प्रहार करते थे; परंतु सम्पूर्ण भूतोंका विनाश करनेवाले उस कालको वे वेध नहीं पाते थे ।। उत्पेदिरे महावाता दारुणाश्ष् दिने दिने | वृष्ण्यन्धकविनाशाय बहवो लोमहर्षणा:,अब प्रतिदिन अनेक बार भयंकर आँधी उठने लगी, जो रोंगटे खड़े कर देनेवाली थी। उससे वृष्णियों और अन्धकोंके विनाशकी सूचना मिल रही थी
utpedire mahāvātā dāruṇāś ca dine dine | vṛṣṇyandhakavināśāya bahavo lomaharṣaṇāḥ ||
वैशम्पायन बोले— दिन-प्रतिदिन भयंकर, रोंगटे खड़े कर देनेवाली प्रचण्ड आँधियाँ बार-बार उठने लगीं; वे वृष्णियों और अन्धकों के विनाश का सूचक अपशकुन थीं।
वैशम्पायन उवाच