अथ तव रथमुख्यास्तान् प्रतीयुस्त्वरन्तः कृपह्नदिकसुतौ च द्रौणिदुर्योधनौ च । शकुनिसुतवृकौ च क्राथदेवावृधौ च द्विदजलदघोषै: स्यन्दनै: कार्मुकैश्व,तदनन्तर कृपाचार्य, कृतवर्मा, अश्वत्थामा, दुर्योधन, शकुनिपुत्र उलूक, वृक, क्राथ और देवावृध--ये आपके प्रमुख महारथी बड़ी उतावलीके साथ धनुष लिये हाथी और मेघोंके समान शब्द करनेवाले रथोंपर आरूढ़ हो उन पाण्डववीरोंका सामना करनेके लिये आ पहुँचे
atha tava rathamukhyās tān pratīyus tvarantaḥ kṛpaḥ hārdikasutaś ca drauṇiḥ duryodhanaś ca | śakunisuta ulūkaś ca vṛkaś ca krāthadevaś ca devāvṛdhaś ca dvidajaladaghoṣaiḥ syandanaiḥ kārmukaiś ca ||
तदनन्तर आपके प्रमुख महारथी—कृपाचार्य, हार्दिकपुत्र कृतवर्मा, द्रोणपुत्र अश्वत्थामा, दुर्योधन, तथा शकुनिपुत्र उलूक, वृक, क्राथदेव और देवावृध—ये सब उतावले होकर धनुष लिये, हाथियों और मेघों के समान गर्जना करनेवाले रथों पर आरूढ़ हो, उन पाण्डववीरों का सामना करने के लिये आगे बढ़े।
संजय उवाच