कर्णपर्व — अध्याय ४०
Karṇa’s Pressure on the Pāñcālas; Duryodhana Disabled; Arjuna’s Counter-Advance
स पक्षाभ्यां स्पृशन्नार्तस्तुण्डेन च महार्णवे । काको दृढपरिश्रान्त: सहसा निपपात ह,ऐसा कहकर अत्यन्त थका-मादा कौआ दोनों पाँखों और चोंचसे जलका स्पर्श करता हुआ सहसा उस महासागरमें गिर पड़ा। उस समय उसे बड़ी पीड़ा हो रही थी
sa pakṣābhyāṃ spṛśann ārtaḥ tuṇḍena ca mahārṇave | kāko dṛḍha-pariśrāntaḥ sahasā nipapāta ha ||
यह कहकर वह अत्यन्त पीड़ित और पूरी तरह थका हुआ कौआ दोनों पंखों और चोंच से महासागर के जल को छूता हुआ सहसा उसी में गिर पड़ा; उस समय वह तीव्र वेदना में था।
शल्य उवाच