कर्णेन युधिष्ठिरानीकविदारणम् / Karṇa’s Breach of Yudhiṣṭhira’s Battle-Line
देवा: प्रसादयामासु: सारथ्यायेति नः श्रुतम् । इस प्रकार देवताओंने तीनों लोकोंके ईश्वर पितामह ब्रह्माजीके आगे मस्तक टेककर उन्हें सारथि बननेके लिये प्रसन्न किया। यह बात हमारे सुननेमें आयी है || ७४ ई ।।
हमने सुना है कि देवताओं ने त्रिलोकेश्वर पितामह ब्रह्मा के आगे मस्तक टेककर उन्हें सारथि बनने के लिए प्रसन्न किया। पितामह बोले— “त्रिदिववासियों ने जो कहा है, उसमें कुछ भी असत्य नहीं है।”
पितामह उवाच