Adhyāya 10: Śrutakarmā’s Engagements; Prativindhya–Citra Duel; Drauṇi Advances toward Bhīma
कर्ण जानामि ते वीर्य सौहृदं परमं मयि । तथापि त्वां महाबाहो प्रवक्ष्यामि हितं वच:
karṇa jānāmi te vīryaṃ sauhṛdaṃ paramaṃ mayi | tathāpi tvāṃ mahābāho pravakṣyāmi hitaṃ vacaḥ ||
दुर्योधन बोला—कर्ण! मैं तुम्हारे पराक्रम को जानता हूँ और मेरे प्रति तुम्हारा परम स्नेह भी समझता हूँ। तथापि, महाबाहो, मैं तुमसे हितकर वचन कहूँगा।
संजय उवाच