ध्वजवर्णनम् | Dhvaja-varṇanam
Description of War Standards
कृच्छेण महता राजन् रजनी व्यत्यवर्तत । राजन! प्रभो! इस प्रकार बातें करते और अर्जुनकी विजय चाहते हुए उन सभी सैनिकोंकी वह रात्रि महान् कष्टसे बीती थी
kṛcchreṇa mahatā rājan rajanī vyatyavartata |
राजन्! इस प्रकार परस्पर बातें करते हुए और पार्थ की विजय की कामना करते हुए उन सब योद्धाओं की वह रात्रि महान् कष्ट से बीती।
संजय उवाच