ध्वजवर्णनम् | Dhvaja-varṇanam
Description of War Standards
फलेन तस्य सर्वस्य सव्यसाची जयत्वरीन् । पाण्डुनन्दन युधिष्ठिरने अर्जुनपर ही सारा विजयका भार रख दिया। यदि हमलोगोंका किया हुआ कुछ भी सत्कर्म शेष हो, यदि हमने दान और होम किये हों तो हमारे उन सभी शुभकर्मोंके फलसे सव्यसाची अर्जुन अपने शत्रुओंपर विजय प्राप्त करें
उन सब शुभकर्मों के फल से सव्यसाची अर्जुन शत्रुओं पर विजय पाएँ। पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर ने अर्जुन पर ही समस्त विजय का भार रख दिया है। यदि हमारे किए हुए कुछ भी सत्कर्म शेष हों, यदि हमने दान और होम किए हों, तो उन्हीं पुण्यफलों से सव्यसाची अर्जुन अपने वैरियों को जीतें।
संजय उवाच