धृष्टद्युम्नस्य द्रोणरथारोহণं सात्यकेः प्रतिरक्षणं च | Dhrishtadyumna Boards Droṇa’s Chariot; Sātyaki’s Counter-Protection
कथं च व: कृतास्त्राणां सर्वेषां शस्त्रपाणिनाम् । सौभद्रो निधनं गच्छेद् वज्जिणापि समागत:,“आप सब लोग अस्त्रविद्याके पण्डित और हाथमें हथियार लिये हुए थे। सुभद्राकुमार अभिमन्यु साक्षात् वज्रधारी इन्द्रसे भी युद्ध करता हो तो भी आपके सामने कैसे मारा जा सकता था?
तुम सब अस्त्रविद्या में निपुण और हाथों में शस्त्र लिये हुए थे; फिर सुभद्रा-पुत्र अभिमन्यु, चाहे वज्रधारी इन्द्र से भी भिड़ जाता, तुम्हारे सामने वह कैसे मारा जा सकता था?
संजय उवाच