रक्षांसि च पिशाचाश्न विनेदुरतिसड्रता: । ववुश्चवाशिशिरा वाता: सूर्यो नैव तताप च,राक्षत और पिशाच परस्पर मिलकर जोर-जोरसे गर्जना करने लगे, गरम हवा चलने लगी और सूर्यका ताप क्षीण हो गया
rakṣāṃsi ca piśācāś ca vinedur ati-saṃrabdhāḥ | vavuś ca vāyavaḥ śiśirāḥ sūryo naiva tatāpa ca ||
संजय बोले—राक्षस और पिशाच अत्यन्त उद्विग्न होकर चीखने-गरजने लगे। शीतल वायु बहने लगी और सूर्य भी मानो तपना छोड़ बैठा।
संजय उवाच