उल्काश्च गगनात् पेतुर्दिशश्व॒ न चकाशिरे । तमश्न सहसा रौद्रं चमूमवततार ताम्,आकाशसे उल्काएँ गिरने लगीं, दिशाओंका प्रकाश लुप्त हो गया और उस सेनामें सहसा भयानक अन्धकार उतर आया
sañjaya uvāca |
ulkāś ca gaganāt petur diśaś ca na cakāśire |
tamaś ca sahasā raudraṁ camūm avatatarā tām ||
संजय बोले—आकाश से उल्काएँ गिरने लगीं, दिशाएँ प्रकाशहीन हो गईं और उस सेना पर सहसा भयानक, रौद्र अंधकार छा गया।
संजय उवाच