तमधर्ममपाकृष्टं स्मृत्वाद्य सहितस्त्वया । सानुबन्धान् हनिष्यामि क्षुद्रान् राज्यहरानहम्,“परंतु अब उनके उन नीचतापूर्ण पापकर्मोंको याद करके मैं तुम्हारे साथ रहकर अपने राज्यका अपहरण करनेवाले इन नीच शत्रुओंको उनके सगे-सम्बन्धियोंसहित मार डालूँगा
उनके उस नीच अधर्म को आज स्मरण करके, तुम्हारे साथ रहकर, मैं राज्य हरण करने वाले उन क्षुद्रों को उनके बंधु-बान्धवों सहित मार डालूँगा।
संजय उवाच