अक्षयं क्षपयेत् वक्षित् क्षत्रिय: क्षत्रियर्ष भम् । “नरेश्वर! अपने तेजसे प्रज्वलित होनेवाले क्षत्रिय-शिरोमणि गाण्डीवधारी अविनाशी अर्जुनको कौन क्षत्रिय मार सकता है?
akṣayaṃ kṣapayeta vakṣit kṣatriyaḥ kṣatriyarṣabham | nareśvara! svena tejasā prajvalitaṃ kṣatriya-śiromaṇiṃ gāṇḍīvadhāriṇam avināśinam arjunaṃ kaḥ kṣatriyo hantuṃ śaknoti?
संजय बोले—नरेश्वर! अपने ही तेज से प्रज्वलित, गाण्डीवधारी, अविनाशी, क्षत्रियों में श्रेष्ठ और योद्धाओं का शिरोमणि अर्जुन—उसे कौन क्षत्रिय मार सकता है?
संजय उवाच