Droṇa Encircled at Night: Coalition Advance and Battlefield Omens (द्रोणपर्यावरणं रात्रियुद्धवर्णनम्)
यादृशं रक्षणे राज्ञ: कार्यमात्ययिकं हि नः । “अतः ट्रुपदनन्दन! मेरे लिये वहाँ जानेकी वैसी आवश्यकता नहीं है, जैसी यहाँ रहकर राजाकी रक्षा करनेकी है। यही हमलोगोंके लिये सबसे महान् कार्य है,ततः क्रुद्धो महाराज भीमसेन: पराक्रमी । अग्रतः स्यन्दनानीकं शरवर्षरवाकिरत्
राजा की रक्षा के लिए जैसा अत्यावश्यक कार्य हमारे सामने है, वैसा कोई और नहीं। इसलिए, हे त्रुपदनन्दन! मेरे लिए वहाँ जाना उतना आवश्यक नहीं, जितना यहाँ रहकर राजा की रक्षा करना। यही हमारे लिए परम कर्तव्य है। तब पराक्रमी महाराज भीमसेन क्रोध से भर उठे और सामने खड़ी रथसेना पर बाणों की वर्षा करने लगे।
संजय उवाच